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'अनिल अंबानी, राणा कपूर ने YES Bank को लगाया 3300 Cr का चूना', ED ने लगाए आरोप

YES बैंक और अनिल अंबानी केस की जांच कर रही ED आज यस बैंक के को-फाउंडर राणा कपूर से दिल्ली में पूछताछ कर रही है।

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राणा कपूर और अनिल अंबानी, Photo Credit: Sora AI

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प्रवर्तन निदेशालय आज यानी सोमवार को यस बैंक के को-फाउंडर राणा कपूर से पूछताछ कर रहा है। अनिल अंबानी से जुड़े मामले में यह पूछताछ दिल्ली में ED के मुख्यालय में हो रही है। ED के आरोप हैं कि राणा कपूर और अनिल अंबानी की मिलीभगत के चलते यस बैंक को 3300 करोड़ रुपये का चूना लगा। साथ ही, यह भी कहा गया है कि अनिल अंबानी और राणा कपूर ने कई मीटिंग भी कीं जिनमें यस बैंक के अधिकारी ही शामिल नहीं हुए। आरोप है कि इन्हीं मीटिंग में ये गैरकानूनी समझौते किए गए और इन समझौतों के बाद राणा कपूर ने यस बैंक के अधिकारियों को ऐसे निर्देश दिए जिनसे बैंक को नुकसान हुआ।

 

ED ने कहा है कि अनिल अंबानी और राणा कपूर के बीच 'Quid-Pro-Quo' जैसी सहमति थी। इसका मतलब हुआ कि दोनों एक-दूसरे को लाभ पहुंचाने के लिए काम कर रहे थे। ED के मुताबिक, राणा कपूर यस बैंक के केंद्र में थे। इसी यस बैंक ने रिलायंस अनिल अंबानी ग्रुप (ADAG ग्रुप) को 31 मार्च 2017 तक 6000 करोड़ रुपये दिए और 31 मार्च 2018 तक यह रकम दोगुनी होकर 13000 करोड़ तक पहुंच गई है। ED का आरोप है कि इसी समय के दौरान यस बैंक ने 5000 करोड़ रुपये ADAG ग्रुप की कंपनियों रिलायंस होम फायनेंस लिमिटेड (RHFL) और रिलायंस कमर्शियल फाइनेंस लिमिटेड (RCFL) में निवेश किए।

 

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ED ने क्या-क्या कहा?

 

जांच कर रही ED का कहना है कि बाद में इसी निवेश का ज्यादातर हिस्सा नॉन-परफॉर्मिंग इन्वेस्टमेंट (NPI) में बदल दिया गया और इस तरह बैंक को लगभग 3300 करोड़ रुपयों का नकुसान हुआ। ED ने आरोप लगाए हैं कि यह कोई सामान्य लेनदेन नहीं बल्कि एक-दूसरे को फायदा पहुंचाने के मकसद से की गई डील थी। आरोप है कि यस बैंक के इसी निवेश के बदले ADAG ग्रुप की कंपनियों ने राणा कपूर के के परिवार के सदस्यों की कंपनियों को लोन दिए।

 

 

 

 

ED ने आरोप लगाए हैं कि राणा कपूर और अनिल अंबानी ने प्राइवेट मीटिंग की और इन मीटिंग में बैंक के अधिकारियों तक को नहीं बुलाया गया। इन्हीं मीटिंग में अवैध समझौते किए गए और बाद में राणा कपूर ने बैंक के अधिकारियों को फर्जी प्रस्तावों को मंजूर करने को कहा।

 

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क्या है पूरा मामला?

 

दरअसल, इस केस में शुरुआत से ही आरोप लगे हैं कि यस बैंक ने गलत तरीके से अनिल अंबानी की कंपनियों को लोन दिए और वे पैसे कभी वापस नहीं मिले। इसी के चलते 2020 में यस बैंक के ग्राहकों के कैश निकालने की सीमा 50 हजार पर रोक दी गई थी। 2024 के अप्रैल महीने में रिजर्व बैंक ने यस बैंक के खातों से पैसे निकालने पर ही रोक लगा दी थी। हालांकि, मार्च 2025 में यह पाबंदी हटा ली गई। 


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