दो महीने पहले मध्य प्रदेश के महू के अवलीपुरा गांव में पुलिस ने दबिश दी थी। यहां एक फार्म हाउस को जुए के अड्डे के तौर पर इस्तेमाल किया जा रहा था। पुलिस ने 18 लोगों को जुआ खेलते पकड़ा और जांच में सामने आया है कि यह फार्महाउस एक महिला आईएएस अधिकारी के नाम पर है। मौके से करीब 14 लाख रुपये की नकदी समेत अन्य सामान बरामद हुआ था।

 

यह फार्महाउस मानपुर थाने के अंतर्गत आता है। मुखबिर की सूचना पर थाना अध्यक्ष लोकेंद्र सिंह हिहोरे की अगुवाई में पुलिस टीम ने जिला मुख्यालय से करीब 50 किमी दूर फार्महाउस पर छापा मारा और 18 लोगों को गिरफ्तार किया। 

 

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लोकेंद्र सिंह हिहोरे ने हाई कोर्ट बताया कि उन पर मामला न दर्ज करने और घटनास्थल को बदलने का दबाव बनाया गया। भारी दबाव के बावजूद मामला दर्ज किया और इसमें फार्महाउस का उल्लेख किया। इसके अगले दिन उन्हें निलंबित कर दिया गया। अब हाई कोर्ट ने 2007 बैच के सब-इंस्पेक्टर लोकेंद्र सिंह हिहोरे को बड़ी राहत दी है। उनके निलंबन को रद्द कर दिया है। 

 

गुरुवार को मध्य प्रदेश के हाई कोर्ट की इंदौर पीठ के न्यायमूर्ति जय कुमार पिल्लई ने हिहोरे की याचिका पर सुनवाई की। उन्होंने दोनों पक्षों की दलील सुनी और 11 मार्च को थाना प्रभारी लोकेंद्र सिंह हिहोरे को निलंबित करने वाले आदेश को रद्द कर दिया। 

 

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पीठ ने कहा कि अपने वैधानिक कर्तव्यों का निर्वहन करने पर एक पुलिस अधिकारी को दंडित करना न्यायालय की अंतरात्मा को झकझोरता है। अगर ऐसे पुराने निलंबन आदेशों को जारी रहने दिया जाता है तो निलंबन के डर से कोई भी अधिकारी किसी भी परिसर पर छापा मारने की हिम्मत नहीं जुटा पाएगा। कोर्ट का कहना है कि यह आदेश मनमाने, दिखावटी और दुर्भावनापूर्ण तरीके से जारी किया गया। दूसरी तरफ मध्य प्रदेश सरकार ने थाना प्रभारी की याचिका पर आपत्ति जताई।