हरियाणा के श्रम विभाग में संभावित फर्जी 1500 करोड़ रुपये के घोटाले की जांच तेज हो गई है। इस घोटाले की जांच के लिए सीएम नायब सिंह सैनी ने एक हाई लेवल जांच कमेटी का गठन कर दिया है। श्रम मंत्री अनिल विज ने इस घोटाले का खुलासा किया था और उनके अनुसार, यह घोटाला 1500 करोड़ रुपये का हो सकता है। डिप्टी कमिश्नर की ओर से बनाई गई एक रिपोर्ट में दावा किया गया है कि कुछ जिलों में तो 97 प्रतिशत तक वर्क स्लिप फर्जी पाई गई हैं। इस घोटाले की खबर ने हरियाणा के प्रशासनिक हल्कों में हलचल तेज कर दी है। 

 

वर्क स्लिप 90 दिनों के रोजगार का प्रमाण होता है। इसके जरिए मजदूरों को पेंशन, शिक्षा, मेडिकल हेल्प और अन्य सुविधाएं मिलती हैं। अब सामने आ रहा है कि इन सभी योजनाओं का लाभ फर्जी और अपात्र लोग उठा रहे थे। इंडियन एक्सप्रेस की एक रिपोर्ट के अनुसार, 10 में से 9 वर्क स्लिप फर्जी हैं। इससे अंदाजा लगाया जा सकता है कि यह घोटाला किस स्तर का है। 

 

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अनिल विज ने किया खुलावा

इस घोटाले का खुलासा मंत्री अनिल विज ने खुद किया है। अनिल विज कर्मकारी कल्याण बोर्ड की मीटिंग ले रहे थे जिसमें वर्क स्लिप की अनियमितताओं का मु्द्दा सामने आया। विभाग के दो कर्मचारियों ने 2,35,672 वर्क स्लिप का वेरिफिकेशन किया और जब घोटाले का शक हुआ तो विभाग ने तीन मेंबर्स की एक जांच कमेटी बनाई। शुरुआती तौर पर इस कमेटी ने हिसार समेत कुल 6 जिलों में बड़े स्तर पर गड़बड़ियों का शक जताया। इसके बाद सभी जिलों में जांच के आदेश दे दिए गए और अनिल विज ने सीएम सैनी को लेटर लिख कर हाई लेवल जांच की मांग की।

 

अनिल विज ने बताया कि शुरुआत में सिर्फ 6 जिलों में मामला सामने आया और उसके बाद सभी जिलों में जिला स्तरीय कमेटी बनाकर जांच शुरू की गई। 2023 से 2025 के बीच जारी वर्क स्लिप को वेरिफाई किया गया। अनिल विज ने कुछ दिन पहले इस मामले में 13 जिलों का डेटा सामने रखा था। उनके अनुसार, इन 13 जिलों में  5,99,758 वर्कस्लिपें जारी की गई थीं, जिनमें से केवल 53,249 वर्कस्लिपें वैध पाई गईं, जबकि 5,46,509 वर्कस्लिपें अवैध पाई गईं। 

करोड़ों का हो सकता है घोटाला

इस मामले में पिछले दो सालों में ही 1500 करोड़ रुपये के घोटाले की जानकारी सामने आ रही है। हालांकि, जांच आगे बढ़ने पर 2 साल पुराने रिकॉर्ड भी खंगाले जा सकते हैं। ऐसे में अनिल विज ने संकेत दिए हैं कि घोटाला इससे भी ज्यादा बड़ा हो सकता है। विभागीय जांच में सिर्फ 12 प्रतिशत वर्क स्लिप ही सही पाई गई हैं। अनिल विज ने कहा कि उन कर्मचारियों की आईडी को फिर से एक्टिव करने के लिए पोर्टल खोला जाएगा, जिनकी पर्चियां वेरिफिकेशन में सही पाई गई हैं। 

 

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कैसे हुआ घोटाला?

जिला स्तर पर तैयार की गई जांच रिपोर्ट में खुलासा हुआ है कि यह घोटाला बड़े नेटवर्क के जरिए हुआ है। फर्जी रजिस्ट्रेशन के लिए एक बड़ा रैकेट चलाया जा रहा था। रिकॉर्ड में गड़बड़ी करके फर्जी कर्मचारियों का रजिस्ट्रेशन किया गया। बिना वेरिफिकेशन के अपात्र व्यक्तियों ने हर एक व्यक्ति के नाम पर औसतन 2.5 लाख रुपये कथित तौर हड़प लिए गए थे।

 

हरियाणा में निर्माण श्रमिकों के लिए मातृत्व-पितृत्व लाभ, शिक्षा सहायता, स्कॉलर्शिप, तकनीकी शिक्षा, पेंशन, विवाह सहायता, मेडिकल हेल्प, होम लोन, दुर्घटना मुआवजा सहित अनेक कल्याणकारी योजनाएं चलाई जा रही हैं, जिनका उद्देश्य वास्तविक श्रमिकों को मजबूत करना है। इन योजनाओं का लाभ केवल उन्हीं श्रमिकों को मिलना चाहिए जो 90 दिनों के काम के वेरिफिकेशन के बाद रजिस्टर्ड हों। बता दें कि वर्क स्लिप के जरिए कर्मचारियों को कई फायदे मिलते हैं। फिलहाल इस मामले की जांच चल रही है और कमेटी कार्रवाई की सिफारिश भी करेगी।