पंजाब सरकार ने कुछ दिन पहले ही पूर्व क्रिकेटर और राज्यसभा हरभजन सिंह की सुरक्षा हटाई थी। अब हरभजन सिंह ने सुरक्षा हटाए जाने के खिलाफ पंजाब और हरियाणा हाई कोर्ट में याचिका दाखिल की। इसमें उन्होंने सुरक्षा हटाने की वजह पूछी और कोर्ट से दोबारा सुरक्षा बहाल करने का अनुरोध किया। 12 मई को अब हाई कोर्ट में अगली सुनवाई होगी।
24 अप्रैल को आम आदमी पार्टी को बड़ा झटका लगा। राघव चड्ढा समेत 10 में से सात सांसदों ने आम आदमी पार्टी को छोड़कर बीजेपी का दामन थाम लिया है। इन सांसदों में क्रिकेटर हरभजन सिंह, राघव चड्ढा, अशोक मित्तल, संदीप पाठक, राजिंदर गुप्ता, विक्रमजीत साहनी और स्वाति मालीवाल का नाम शामिल है।
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इनका आरोप है कि आम आदमी पार्टी अपनी राह से भटक गई। उस पर भ्रष्ट और कंप्रोमाइज्ड लोगों का नियंत्रण हो गया है। बता दें कि आप छोड़ने वाले सात में से छह सांसद पंजाब से हैं। उधर, राज्यसभा के सभापति सीपी राधाकृष्णन ने इन सांसदों के बीजेपी में विलय की मंजूरी दी।
आप कार्यकर्ताओं ने किया था प्रदर्शन
बीजेपी में शामिल होने के बाद पंजाब पुलिस ने हरभजन सिंह की सुरक्षा को हटा लिया था। आम आदमी पार्टी कार्यकर्ताओं ने अशोक मित्तल, राजिंदर गुप्ता और हरभजन सिंह के आवास के बाहर प्रदर्शन किया था। जालंधर स्थित हरभजन सिंह के आवास के गेट पर स्प्रे पेंट से गद्दार लिख दिया था। हालांकि बाद में जालंधर स्थित उनके आवास के बाहर केंद्र सरकार ने केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (CRPF) तैनात कर दी है।
बदले की भावना से हटाई गई सुरक्षा: हरभजन सिंह
पूर्व क्रिकेटर हरभजन सिंह ने अपनी याचिका में कहा कि उनकी सुरक्षा को बेहद ही मनमाने और बदले की भावना से अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक (सुरक्षा) ने हटाई है। सुरक्षा हटाने से पहले न तो नए खतरे का आकलन किया गया और न ही कोई नोटिस व सुनवाई का मौका दिया गया। याचिका में हरभजन सिंह ने हाई कोर्ट से सुरक्षा बहाल करने का निर्देश देने का अनुरोध किया है।
'पुलिस ने कोई एक्शन नहीं लिया'
हाई कोर्ट को बताया गया कि सुरक्षा हटाए जाने के तुरंत बाद 25 और 26 अप्रैल को एक हिंसक भीड़ ने स्थानीय पुलिस की मौजूदगी में याचिकाकर्ता के आवास पर हमला किया था। स्थानीय पुलिस कोई भी एक्शन लेने में विफल रही।
याचिका में यह भी कहा गया कि 25 अप्रैल की सुबह घर पर तैनात सभी पुलिसकर्मी चले गए। जालंधर के डिप्टी कमिश्नर ने आप के सदस्यों को याचिकाकर्ता के घर पर विरोध प्रदर्शन करने की अनुमति दी। दोपहर करीब ढाई बजे भीड़ याचिकाकर्ता के घर पहुंची और घर की बाहरी दीवारों पर 'गद्दार' लिखा और घर का सामने वाला गेट तोड़ना शुरू कर दिया। उस वक्त याचिकाकर्ता किसी निजी कार्यक्रम के सिलसिले में मुंबई में थे। तभी उन्हें अपने जीजा से फोन पर घर पर हमले की जानकारी मिली।
'हमले में पुलिस ने भीड़ की मदद की'
आगे कहा गया कि याचिकाकर्ता के जीजा ने उन्हें बताया कि स्थानीय पुलिस को पहले ही सूचना दे दी गई थी। भीड़ ने स्थानीय जालंधर ACP (पूर्व) और एसएचओ सब-डिवीजन नंबर 7 की मौजूदगी में घर पर हमला किया। भीड़ के खिलाफ कोई एक्शन लेने के बजाय पुलिस अधिकारी उलटे याचिकाकर्ता के घर पर हमले में भीड़ की मदद कर रहे हैं।
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अपनी याचिका में हरभजन सिंह ने कहा कि एडीजीपी ने सुरक्षा हटाने का आदेश जारी करते समय जालंधर के पुलिस कमिश्नर को जरूरी सुरक्षा इंतजाम करने का निर्देश दिया था, लेकिन ऐसा कोई इंतजाम नहीं किया गया। सुरक्षा देने के बजाय जब भीड़ ने हमला किया तो पुलिस मूकदर्शक बनी रही।
डर के साये में जी रहा परिवार: हरभजन सिंह
याचिका में कहा गया कि हरभजन सिंह, उनकी बुजुर्ग मां, पत्नी, 10 साल की बेटी और पांच साल का बेटा लगातार डर और आशंका के साये में जी रहे हैं। सामान्य रोजमर्रा की जिंदगी बुरी तरह से प्रभावित हुई है। सुरक्षा विंग ने सुरक्षा हटाने का कोई उचित कारण नहीं बताया है। अगर सुरक्षा कम भी करनी थी तो उसे चरणबद्ध और खतरे का आकलन करने के बाद किया जाना चाहिए था। बिना आकलन के सुरक्षा हटाना पूरी तरह से गैर-कानूनी, मनमाना और गलत है।
