पश्चिम बंगाल में भारतीय जनता पार्टी (BJP) की सरकार बन गई है। सरकार गठन के बाद ही एक नेता की गिरफ्तारी पर हंगामा बरपा है। प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने सोमवार को तृणमूल कांग्रेस (TMC) के वरिष्ठ नेता और पूर्व अग्निशमन एवं आपातकालीन सेवा मंत्री सुजीत बोस को गिरफ्तार कर लिया। म्यूनिसिपल भर्ती घोटाले की जांच में 10 घंटे से ज्यादा पूछताछ के बाद उन्हें गिरफ्तार किया गया।
सुजीत बोस पर आरोप है कि उनके बयान, बार-बार बदल रहे थे, वह सहयोग के लिए तैयार नहीं थे। एजेंसी को मुश्किल हो रही थी, इसलिए उन्हें गिरफ्तार किया गया है। जांच एजेंसी ने जैसे ही उन्हें गिरफ्तार किया, अब उनकी गिरफ्तारी पर हंगामा बरपा है। तृणमूल कांग्रेस इसे बदले की कार्रवाई करार दे रही है।
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कौन हैं सुजीत बोस?
सुजीत बोस बिधाननगर सीट से विधायक रह चुके हैं। साल 2009 में पहली बार यहां से जीते थे और उसके बाद लगातार जीतते आए थे। विधानसभा चुनाव 2026 में उन्हें हार का सामना करना पड़ा। टीएमसी की हार के बाद यह पहला मामला है जब किसी टीएमसी नेता को गिरफ्तार किया गया है। बिधाननगर में स्थानीय लोगों ने बोस और टीएमसी सरकार से नाराजगी जताई थी। सड़कें खस्ताहाल, कचरा न उठना और बारिश में जलभराव जैसी समस्याओं के चलते बोस 37,330 वोटों से हार गए।
क्यों चर्चा में रहते हैं सुजीत बोस?
सुजीत बोस कोलकाता के बड़े दुर्गा पूजा आयोजकों में से एक हैं। वह श्रीभूमि स्पोर्टिंग क्लब में बड़ी झांकी आयोजित कराते थे, जिसकी वजह से कभी-कभी VIP रोड पर ट्रैफिक पूरी तरह ठप हो जाता था। एक बार तत्कालीन मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने उन्हें चेतावनी दी थी कि अगर एयरपोर्ट की तरफ ट्रैफिक प्रभावित हुआ तो उन्हें रोका जाएगा।
कैसा रहा है सियासी सफर?
सुजीत बोस, पहले CPI (M) से जुड़े थे। वह लेफ्ट सरकार में मंत्री रहे सुभाष चक्रवर्ती के भरोसेमंद थे। साल 2001 में अनबन के बाद वह तृणमूल कांग्रेस में आए। साल 2006 में उन्होंने सुभाष चक्रवर्ती के खिलाफ चुनाव लड़ा, लेकिन हार गए। 2009 में सुभाष चक्रवर्ती पहली बार विधायक बने। 2021 के चुनाव में जीत के बाद उन्हें मंत्री बनाया गया। सुजीत बोस, ममता बनर्जी के करीबी हैं और उत्तर बंगाल के चर्चित नेताओं में शुमार हैं।
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किस घोटाले में फंसे हैं सुजीत बोस?
सुजीत बोस, जिसस मामले में गिरफ्तार हुए हैं, वह 2023 का है। सरकारी सहयता प्राप्त स्कूलों के भर्ती में अनियमितता सामने आई थी। राज्य के करीब 60 नगर पालिकाओं में लगभग 5000 लोगों को स्थायी नौकरियां दिलाईं गईं थीं। कोलकाता के आसपास की कई नगर पालिकाएं, साउथ दम दम, कमारहाटी, पानीहाटी, नॉर्थ दम दम और बारानगर आदि इस घोटाले के दायरे में हैं।
ईडी ने सुजीत बोस को कई बार समन भेजा था। अप्रैल-मई 2026 में चुनाव प्रचार के दौरान भी उन्हें समन मिला था। अक्टूबर 2025 में ईडी ने बोस के सॉल्ट लेक ऑफिस, उनके बेटे के रेस्तरां, सहयोगी निताई दत्ता के घर और कुछ चार्टर्ड अकाउंटेंट के घरों पर छापेमारी की थी।
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क्यों आलोचना हो रही है?
मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने टीएमसी शासनकाल के सभी भ्रष्टाचार मामलों की जांच के लिए रिटायर्ड जज की अध्यक्षता में आयोग बनाने का वादा किया है। सुजीत बोस की गिरफ्तारी को इसी अभियान का शुरुआती कदम माना जा रहा है।
