देश की राष्ट्रपति द्रोपदी मुर्मु ने कल पंजाब की तीन हस्तियों को पद्मश्री से सम्मानित किया। सम्मान पाने वालों में हॉकी कोच बलदेव सिंह, भारतीय महिला क्रिकेट टीम की कप्तान हरमनप्रीत कौर और संत निरंजन दास शामिल हैं। संत निरंजन दास के नाम की चर्चा पंजाब के सियासी गलियारे में काफी ज्यादा हो रही है। इसके पीछे उनका राजनीतिक प्रभाव एक बड़ी वजह है।
संत निरंजन दास पंजाब के जालंधर के पास बल्लां में स्थित डेरा सचखंड के प्रमुख हैं। इसी साल 1 फरवरी को रविदास जयंती के मौके पर पीएम मोदी इस डेरे में पहुंचे थे। इस डेरे का पंजाब की कई विधानसभा सीटों पर अच्छा खासा प्रभाव है और तमाम राजनेता डेरा प्रमुख से आशीर्वाद लेकर अपनी चुनावी नैया पार लगाने की कोशिश करते हैं। कांग्रेस नेता राहुल गांधी, अरविंद केजरीवाल समेत तमाम विपक्षी नेता इस डेरे में पहुंच चुके हैं।
यह भी पढ़ें: बांकीपुर में RJD नहीं, BJP को क्यों हराना चाहते हैं प्रशांत किशोर? समझिए प्लान
क्यों है इतना अहम?
डेरा सचखंड पंजाब में रविदासिया समाज का एक प्रमुख केंद्र है। पंजाब की राजनीति में रविदासिया समुदाय बहुत अहम है। रविदासिया समुदाय का वर्चस्व दोआबा क्षेत्र में सबसे ज्यादा है। पंजाब में दलित समुदाय की आबादी करीब 32 प्रतिशत है और इनमें सबसे ज्यादा संख्या रविदासिया समुदाय की है। कांग्रेस ने 2022 चुनाव से पहले कैप्टन अमरिंदर सिंह को हटाकर इसी रविदासिया समुदाय से आने वाले चरनजीत सिंह चन्नी को सीएम बनाया था। रविदासिया समुदाय के वोट पंजाब में खासकर दोआबा क्षेत्र में निर्णायक भूमिका निभा सकते हैं।
दोआबा में मिलेगा लाभ
पंजाब में भारतीय जनता पार्टी इस डेरे को काफी महत्व दे रही है। इसके अलावा डेरा प्रमुख को अब पद्मश्री से सम्मानित कर बीजेपी इस समुदाय के लोगों के दिलों में जगह बनाने की कोशिश कर रही है। पहले पीएम मोदी का यहां आना और उसके बाद अब संत निरंजन दास को सम्मानित करना बीजेपी की दोआबा रीजन में अपना प्रभाव बढ़ाने की रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है।
दोआबा बेल्ट के चारों जिलों में दलित समुदाय अच्छी खासी पकड़ रखता है और इस रीजन में विधानसभा की 23 सीटें हैं और इन में से 9 सीटें रिजर्व हैं। 2011 की जनगणना के अनुसार, इस रीजन में 52.08 लाख लोग रहते हैं। इनमें 19.48 लाख लोग दलित हैं और इनमें 11.88 लाख रविदास, 4.56 लाख वालमिकी और 3.04 लाख अन्य दलित समुदायों की संख्या है। रविदासिया समुदाय में डेरा सचखंड बल्लां का बहुत ज्यादा प्रभाव है।
यह भी पढ़ें: चुनाव से पहले पंजाब BJP में होंगे बड़े बदलाव, किन चेहरों की लग सकती है लॉटरी?
बीजेपी की रणनीति
भारतीय जनता पार्टी पंजाब में सामाजिक समीकरणों के जरिए जीत का सपना देख रही है। पार्टी हिंदू समुदाय के साथ-साथ सिख समुदाय और अन्य समुदायों को वोट लेने की भी कोशिश कर रही है। पार्टी इसी रणनीति के तहत रविदासिया समुदाय को अपने साथ जोड़ रही है। इसके साथ ही ओबीसी समुदाय को भी अपने साथ जोड़ने की कोशिशें की जा रही है। इसके लिए हरियाणा के सीएम जो खुद ओबीसी समुदाय से आते हैं, उनकी जिम्मेदारी लगाई गई है। वह पिछले कई महीनों से पंजाब में एक्टिव हैं।
