कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी ने लोकसभा में महिला आरक्षण से संबंधित संविधान संशोधन विधेयक के पास न होने पर खुशी जताई है। उन्होंने कहा है कि यह लोकतंत्र की जीत है। प्रियंका गांधी ने इसे राजनीतिक साजिश करार दिया था। उन्होंने कहा कि इस विधेयक का गिरना, संविधान की जीत है। 

प्रियंका गांधी ने कहा कि यह विधेयक संघीय ढांचे को बदलने का षड्यंत्र था और इसका गिरना संविधान और विपक्षी एकजुटता की जीत है। सरकार 2023 के नारी शक्ति वंदन अधिनियम को लोकसभा की वर्तमान 543 सीट के आधार पर तत्काल लागू कर सकती है और यदि वह ऐसा करती है तो विपक्ष इसका समर्थन करेगा।

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प्रियंका गांधी, सांसद, कांग्रेस:-
पूरी साजिश यही रची गई कि किसी न किस तरह स्थायी रूप से सत्ता में रहना है। यह काम महिलाओं के नाम पर करने का प्रयास किया गया। महिलाओं का मसीहा बनने की कोशिश की गई, महिलाओं का मसीहा बनने के लिए काम करना होता है।

विपक्ष एकजुट हो तो मोदी सरकार हार जाएगी 

प्रियंका गांधी:-
यह महिला आरक्षण बिल की बात नहीं थी। यह बात परिसीमन से जुड़ी हुई थी। मोदी सरकार को परिसीमन इस आधार पर करना था, जिसमें उसे जातिगत जनगणना के आंकड़ों को देखने की जरूरत नहीं होती और मनमानी करने की पूरी आजादी होती। ऐसे में मुमकिन ही नहीं था कि विपक्ष मोदी सरकार का साथ दे। पूरे देश ने देख लिया है कि जब विपक्ष एकजुट होता है तो कैसे मोदी सरकार को हराया जाता है।

कांग्रेस ने विधेयक के मकसद पर क्या कहा?

प्रियंका गांधी:-
2023 में जो महिला आरक्षण विधेयक सर्वसम्मति से पारित हुआ था, मोदी सरकार उसे अभी लागू करे और महिलाओं को अधिकार दे। महिला आरक्षण के लिए पूरा विपक्ष तैयार है।


प्रियंका गांधी ने कहा कि यह संविधान संशोधन विधेयक महिला आरक्षण के लिए नहीं था, यह परिसीमन के लिए था और यह बिल्कुल साफ था कि विपक्ष इसे समर्थन नहीं देने वाला था।

प्रियंका गांधी ने कहा, 'देश की जनता जागरूक है, सरकार उसे गुमराह नहीं कर सकती। भारत की जनता देख रही है कि मोदी सरकार सिर्फ मीडियाबाजी और PR पर टिकी हुई है और इसमें उनके करोड़ों रुपए खर्च किए जा रहे हैं। अमित शाह जी कल कह रहे थे कि हम पर भरोसा करिए, लेकिन असलियत यही है कि जनता का भरोसा इस सरकार से उठ चुका है।'

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प्रियंका गांधी, सांसद, कांग्रेस:-
सरकार के लोग कह रहे हैं कि कल काला दिन था। हां, उनके लिए काला दिन इसलिए है कि उन्हें पहली बार धक्का लगा है। अगर महिला आरक्षण लागू करना है तो 2023 के कानून को लागू कीजिए जिसमें पूरा विपक्ष साथ देगा।

प्रियंका गांधी ने कहा, 'कल जो हुआ वो लोकतंत्र के लिए एक बहुत बड़ी जीत थी। संघीय ढांचे को बदलने और लोकतंत्र को कमजोर करने की सरकार की जो साजिश थी, उसको रोका गया। यह संविधान की जीत थी, देश की जीत थी और विपक्ष की एकता की जीत थी और यह सत्ता पक्ष के नेताओं के चेहरों पर साफ दिख रहा था।' 

प्रियंका गांधी:-
मुझे लगता है कि यह एक साज़िश है कि किसी तरह उन्हें सत्ता में बने रहना है। इसलिए इसे हासिल करने के लिए, वे महिलाओं का इस्तेमाल करके हमेशा सत्ता में बने रहने की प्लानिंग कर रहे हैं। उन्होंने सोचा कि अगर यह पास हो गया तो वे जीत जाएंगे। अगर यह पास नहीं हुआ, तो वे दूसरी पार्टियों को महिला विरोधी बताकर महिलाओं के मसीहा बन जाएंगे। हम जानते हैं कि महिलाओं के लिए मसीहा बनना आसान नहीं है।

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लोकसभा में पहली बार मोदी सरकार को झटका लगा

लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत आरक्षण 2029 के लोकसभा चुनाव से लागू करने के लिए सरकार संशोधन लाना चाह रही थी। यह विधेयक, शुक्रवार को संसद के निचले सदन से ही पारित नहीं हो पाया। सरकार को 2 तिहाई बहुमत की जरूरत थी, विपक्ष ने साथ नहीं दिया।

संसद में कैसे गिरा महत्वाकांक्षी विधेयक?

सदन में संविधान का 131वां संशोधन विधेयक 2026 गिर गया। पक्ष में 298 और विरोध में 230 वोट पड़े। लोकसभा में किसी भी संविधान संशोधन विधेयक को पारित करने के लिए दो तिहाई बहुमत की जरूरत होती है। मोदी सरकार के पास यह संख्या बल नहीं था। सरकार ने इस विधेयक के साथ परिसीमन विधेयक, 2026 और संघ राज्य विधि (संशोधन) विधेयक, 2026 को भी सदन में चर्चा और पारित कराने के लिए रखा था, लेकिन उन्हें भी आगे नहीं बढ़ाया जा सका। निचले सदन से ही ये विधेयक पास नहीं हो सके।