अमेरिका-इज़रायल-ईरान युद्ध तेज़ी पकड़ रहा है । इसी बीच फारस की खाड़ी में एक छोटा सा आईलैंड बहुत महत्वपूर्ण हो गया है। इस आइलैंड का नाम है खर्ग आइलैंड। खर्ग आइलैंड ईरा0न का एक छोटा सा आइलैंड है, जो फारस की खाड़ी में ईरान के तट से करीब 25-30 किलोमीटर दूर है। यह आइलैंड छोटा है लेकिन ईरान की अर्थव्यवस्था के लिए बहुत बड़ी भूमिका निभाता है।
यहां ईरान का सबसे बड़ा तेल निर्यात केंद्र है। ईरान का लगभग 90 प्रतिशत कच्चा तेल इसी आइलैंड से जहाजों में भरकर दुनिया भर में भेजा जाता है। यहां रोज़ाना लाखों बैरल तेल लोड हो सकता है। 1960 के दशक से यह सुविधा बहुत विकसित हुई है।
यह भी पढ़ें: ऐसे नहीं मानेगा ईरान, आधी रात में इजरायल-सऊदी पर बरसाईं मिसाइलें
युद्ध में अब तक क्या हुआ?
अमेरिका और इज़रायल ने ईरान के कई सैन्य ठिकानों, मिसाइल बेस और न्यूक्लियर फेसिलिटीज़ पर हमले किए हैं। लेकिन खर्ग आइलैंड पर अब तक कोई बड़ा हमला नहीं हुआ है। यह जानबूझकर किया गया है क्योंकि अगर इस आइलैंड पर हमला होता है या तेल निर्यात रुक जाता है तो ईरान की कमाई बहुत कम हो जाएगी। साथ ही दुनिया में तेल की कीमतें बहुत तेज़ी से बढ़ सकती हैं। खाड़ी में जहाज़ों की आवाजाही बाधित हो सकती है। खर्ग आइलैंड होर्मुज़ स्ट्रेट के पास है जो दुनिया का सबसे महत्वपूर्ण तेल मार्ग है। इसलिए हमला करने पर काफी बड़ा खतरा उत्पन्न हो सकता है।
ट्रंप प्रशासन अब क्या सोच रहा है?
एक्सियोस की रिपोर्ट के अनुसार, डोनाल्ड ट्रंप की सरकार अब खर्ग आइलैंड पर नए सैन्य विकल्पों पर विचार कर रही है। अमेरिका और इजरायल के अधिकारी खास कमांडो ऑपरेशन की बात कर रहे हैं। इसमें आइलैंड पर कब्ज़ा करने या इसे नष्ट कर देने की योजना है। ऐसा करने से ईरान की तेल कमाई रुक जाएगी, जो ईरान सरकार की मुख्य आय है। इससे ईरान युद्ध लड़ने में कमजोर पड़ सकता है।
न्यूक्लियर कनेक्शन भी है
ईरान के पास करीब 450 किलो 60 प्रतिशत शुद्ध यूरेनियम है, जो जल्दी हथियार बनाने लायक बन सकता है। अमेरिका और इजरायल सोच रहे हैं कि अगर ईरान कमजोर होता है, तो कमांडो भेजकर इस मटीरियल को सुरक्षित कर लें या नष्ट कर दें। खर्ग आइलैंड पर कोई ऑपरेशन इस बड़े प्लान का हिस्सा हो सकता है।
अब तक क्यों नहीं छुआ गया?
विशेषज्ञों का कहना है कि खर्ग आइलैंड पर हमला न करने का फैसला सोचा-समझा है। इससे वैश्विक तेल बाजार अस्थिर हो सकता है, कीमतें बहुत बढ़ सकती हैं और युद्ध बड़ा क्षेत्रीय युद्ध बन सकता है। युद्ध के बाद ईरान में नई सरकार बनाने में भी मुश्किल आएगी। इसलिए पहले ईरान की सैन्य और न्यूक्लियर ताकत को कमजोर करने पर फोकस है।
यह भी पढ़ें: 'अभी ईरान से संपर्क मुश्किल है...', संसद में क्या-क्या बोले एस जयशंकर?
क्या तय करेगा युद्ध की रणनीति?
खर्ग आइलैंड पर हमला या कब्ज़ा करने से ईरान की कमाई खत्म हो सकती है और सरकार कमजोर पड़ सकती है। लेकिन इससे खाड़ी में बड़ा संकट आ सकता है और दुनिया की अर्थव्यवस्था प्रभावित हो सकती है। अभी यह आइलैंड युद्ध का मैदान नहीं बना है लेकिन जैसे-जैसे युद्ध बढ़ेगा, यह बहुत महत्वपूर्ण फैक्टर बन सकता है।
अमेरिका-इज़रायल-ईरान युद्ध तेज़ी पकड़ रहा है । इसी बीच फारस की खाड़ी में एक छोटा सा आईलैंड बहुत महत्वपूर्ण हो गया है। इस आइलैंड का नाम है खर्ग आइलैंड। खर्ग आइलैंड ईरा0न का एक छोटा सा आइलैंड है, जो फारस की खाड़ी में ईरान के तट से करीब 25-30 किलोमीटर दूर है। यह आइलैंड छोटा है लेकिन ईरान की अर्थव्यवस्था के लिए बहुत बड़ी भूमिका निभाता है।
यहां ईरान का सबसे बड़ा तेल निर्यात केंद्र है। ईरान का लगभग 90 प्रतिशत कच्चा तेल इसी आइलैंड से जहाजों में भरकर दुनिया भर में भेजा जाता है। यहां रोज़ाना लाखों बैरल तेल लोड हो सकता है। 1960 के दशक से यह सुविधा बहुत विकसित हुई है।
यह भी पढ़ें: ऐसे नहीं मानेगा ईरान, आधी रात में इजरायल-सऊदी पर बरसाईं मिसाइलें
युद्ध में अब तक क्या हुआ?
अमेरिका और इज़रायल ने ईरान के कई सैन्य ठिकानों, मिसाइल बेस और न्यूक्लियर फेसिलिटीज़ पर हमले किए हैं। लेकिन खर्ग आइलैंड पर अब तक कोई बड़ा हमला नहीं हुआ है। यह जानबूझकर किया गया है क्योंकि अगर इस आइलैंड पर हमला होता है या तेल निर्यात रुक जाता है तो ईरान की कमाई बहुत कम हो जाएगी। साथ ही दुनिया में तेल की कीमतें बहुत तेज़ी से बढ़ सकती हैं। खाड़ी में जहाज़ों की आवाजाही बाधित हो सकती है। खर्ग आइलैंड होर्मुज़ स्ट्रेट के पास है जो दुनिया का सबसे महत्वपूर्ण तेल मार्ग है। इसलिए हमला करने पर काफी बड़ा खतरा उत्पन्न हो सकता है।
ट्रंप प्रशासन अब क्या सोच रहा है?
एक्सियोस की रिपोर्ट के अनुसार, डोनाल्ड ट्रंप की सरकार अब खर्ग आइलैंड पर नए सैन्य विकल्पों पर विचार कर रही है। अमेरिका और इजरायल के अधिकारी खास कमांडो ऑपरेशन की बात कर रहे हैं। इसमें आइलैंड पर कब्ज़ा करने या इसे नष्ट कर देने की योजना है। ऐसा करने से ईरान की तेल कमाई रुक जाएगी, जो ईरान सरकार की मुख्य आय है। इससे ईरान युद्ध लड़ने में कमजोर पड़ सकता है।
न्यूक्लियर कनेक्शन भी है
ईरान के पास करीब 450 किलो 60 प्रतिशत शुद्ध यूरेनियम है, जो जल्दी हथियार बनाने लायक बन सकता है। अमेरिका और इजरायल सोच रहे हैं कि अगर ईरान कमजोर होता है, तो कमांडो भेजकर इस मटीरियल को सुरक्षित कर लें या नष्ट कर दें। खर्ग आइलैंड पर कोई ऑपरेशन इस बड़े प्लान का हिस्सा हो सकता है।
अब तक क्यों नहीं छुआ गया?
विशेषज्ञों का कहना है कि खर्ग आइलैंड पर हमला न करने का फैसला सोचा-समझा है। इससे वैश्विक तेल बाजार अस्थिर हो सकता है, कीमतें बहुत बढ़ सकती हैं और युद्ध बड़ा क्षेत्रीय युद्ध बन सकता है। युद्ध के बाद ईरान में नई सरकार बनाने में भी मुश्किल आएगी। इसलिए पहले ईरान की सैन्य और न्यूक्लियर ताकत को कमजोर करने पर फोकस है।
यह भी पढ़ें: 'अभी ईरान से संपर्क मुश्किल है...', संसद में क्या-क्या बोले एस जयशंकर?
क्या तय करेगा युद्ध की रणनीति?
खर्ग आइलैंड पर हमला या कब्ज़ा करने से ईरान की कमाई खत्म हो सकती है और सरकार कमजोर पड़ सकती है। लेकिन इससे खाड़ी में बड़ा संकट आ सकता है और दुनिया की अर्थव्यवस्था प्रभावित हो सकती है। अभी यह आइलैंड युद्ध का मैदान नहीं बना है लेकिन जैसे-जैसे युद्ध बढ़ेगा, यह बहुत महत्वपूर्ण फैक्टर बन सकता है।
15:29
Timelinethree
dfdfdfdfdfdfdfdfdfddfdfdfd
16:19
Timelinefour
Timelinefour
यह भी पढ़ें: Timeline Tester
यह भी पढ़ें: EnglishTImelineChekcingmondahy
यह भी पढ़ें: Timlione check
यह भी पढ़ें: अलहिंद के जैसे कैसे शुरू कर सकते हैं अपनी एयरलाइन, खर्च और प्रक्रिया क्या है?
16:19
Timelinesiz
16:20
Timelineseven
16:20
Timeline8
15:28
Timeline OnCheck
Timeline OnCheckTimeline OnCheckTimeline OnCheck
15:28
Timeline Two
TimelineTwo
