भारत में लंबे समय के बाद डीजल और पेट्रोल की कीमतों में इजाफा हुआ है। हफ्ते भर में ही दो बार तेल की कीमतें बढ़ चुकी हैं और कयास लगाए जा रहे हैं कि अभी इसमें और इजाफा होगा। वैश्विक हालात को देखते हुए सरकार का कहना है कि तेल कंपनियों को नुकसान से बचाने के लिए यह बढ़ोतरी है। रोचक बात है कि भारत में पिछले कई साल में तेल की कीमतों में बदलाव नहीं हुआ था। इसी के चलते पिछले पांच साल में तीन प्रमुख कंपनियों इंडियन ऑयल, हिंदुस्तान पेट्रोलियम और भारत पेट्रोलियम ने कुल मिलाकर 2.7 लाख करोड़ से ज्यादा का मुनाफा कमाया है। इसकी वजह है कि जब कच्चे तेल की कीमत कम थी तब भी दाम कम नहीं किए गए ताकि कंपनियां मुनाफा कमा सकें। अब चंद महीने में ही तेल की कीमतें बढ़ा दी गई थीं जबकि पहले यह कहा गया था कि तेल की कीमतें दोनों ही स्थिति में नहीं बदलेंगी।
अब तेल के दाम बढ़ जाने के चलते ही सवाल उठाए जा रहे हैं। सवाल पूछे जा रहे हैं कि जब कच्चा तेल सस्ता होने पर भी डीजल-पेट्रोल की कीमतें स्थिर रखी गईं तो अब दाम क्यों बढ़ाए दिए गए हैं? बता दें कि पिछले दो साल में कच्चे तेल की कीमतों में पहली तो खूब कमी आई और फिर अचानक तेजी आई और एक बैरल कच्चे तेल की कीमत 100 डॉलर के पार पहुंच गई। इसका असर पूरी दुनिया में देखा जा रहा है और तेल की कीमतें बढ़ गई हैं।
भारत में कैसे चलता है तेल का कारोबार?
भारत में आप आम तौर पर इंडियन ऑयल, भारत पेट्रोलियम, हिंदुस्तान पेट्रोलियम, रिलायंस और नायरा समेत तमाम कंपनियों के पेट्रोल पंप देखते होंगे। ये सभी कंपनियां दूसरे देशों से कच्चा तेल खरीदती हैं, उसे रिफाइन करती हैं और भारत के साथ-साथ दूसरे देशों में भी उसे बेचती हैं। सबसे बड़ी कंपनी इंडियन ऑयल है जिसकी भारत में हिस्सेदारी लगभग 40 प्रतिशत है। दूसरे नंबर पर भारत पेट्रोलियम है जिसकी हिस्सेदारी लगभग 25 प्रतिशत है। तीसरे नंबर पर मौजूद हिंदुस्तान पेट्रोलियम की हिस्सेदारी लगभग 17 से 20 प्रतिशत है। यहां हिस्सेदारी से मतलब है कि कितने लोग इन कंपनियों का तेल खरीदते हैं। 40 प्रतिशत का मतलब है कि भारत के 100 में से 40 लोग इंडियन ऑयल का पेट्रोल पंप खरीदते हैं।
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यही तेल कंपनियां ही तेल के दाम तय करती हैं और सरकार इसमें हस्तक्षेप नहीं करती है। सरकार सिर्फ टैक्स बढ़ाकर या घटाकर तेल के दाम में कटौती या बढ़ोतरी कर सकती है। अब होता यह है कि जब कच्चा तेल सस्ता होता है तब भी ये कंपनियां तेल के दाम कम नहीं करती हैं। पिछले 4 साल में यही देखा गया कि जब कच्चा तेल सस्ता हुआ तब भी दाम नहीं कम हुआ और बढ़ने पर बढ़ाए भी नहीं। जब कच्चा तेल सस्ता था तब कंपनियों ने मुनाफा कमाया ताकि महंगाई की स्थिति में वे अपने इसी मुनाफे के पैसों से संतुलन बना सकें। हालांकि, यह प्लान चंद महीनों में ही औंधे मुंह गिरता दिख रहा है और तेल के दाम बढ़ गए हैं।
तेल कंपनियों ने कितना मुनाफा कमाया?
अगर इन तीन प्रमुख कंपनियों के फायदे को देखें तो वित्त वर्ष 2021-22 से लेकर वित्त वर्ष 2025-26 तक इन तीनों कंपनियों ने 2.70 लाख करोड़ रुपये का मुनाफा कमाया। अगर दिन के हिसाब से देखें तो इन कंपनियों ने हर दिन लगभग 148 करोड़ रुपये का मुनाफा कमाया। अब भारत के पेट्रोलियम मंत्री हरदीप पुरी का कहना है कि इन कंपनियों को हर दिन लगभग एक हजार करोड़ का नुकसान उठाना पड़ रहा है इसलिए तेल की कीमतें संभालना मुश्किल हो गया है।
इंडियन ऑयल
देश की सबसे बड़ी कंपनी इंडियन ऑयल ने बताया है कि उसके लगभग हर तरह के कारोबार ने साल 2025-26 में पिछले सारे रिकॉर्ड तोड़ दिए। साल 2025-26 में इंडियन ऑयल का मुनाफा कुल 36802 करोड़ रुपये (टैक्स काटने के बाद) का था। यानी पिछले साल इंडियन ऑयल ने हर दिन लगभग 100 करोड़ रुपये का मुनाफा कमाया है।
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इससे पहले, 2024-25 में 13789 करोड़, 2023-24 में 43161 करोड़, 2022-23 में 11704 करोड़ और 2021-22 में कुल 25727 करोड़ रुपये का मुनाफा कमाया।
भारत पेट्रोलियम
भारत पेट्रोलियम के पिछले पांच साल के वित्तीय आंकड़े बताते हैं कि उसे भी हर साल जबरदस्त मुनाफा हुआ है। 2025-26 में टैक्स काटने के बाद भारत पेट्रोलियम का मुनाफा 24611 करोड़ का रहा यानी हर दिन लगभग 67 करोड़ का मुनाफा हुआ।
इसी तरह 2024-25 में 13,337 करोड़, 2023-24 में 26829 करोड़, 2022-23 में 2131 करोड़ और 2021-22 में कुल 11682 करोड़ रुपये का फायदा हुआ।
हिंदुस्तान पेट्रोलियम
तीसरी सबसे बड़ी कंपनी हिंदुस्तान पेट्रोलियम को सिर्फ 2022-23 में 6980 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ लेकिन पिछले तीन साल में उसके जबरदस्त मुनाफा हुआ। 2021-22 में हिंदुस्तान पेट्रोलियम को 7294 करोड़ का फायदा हुआ। 2023-24 में उसे 16015 करोड़ का मुनाफा हुआ, 2024-25 में 6736 करोड़ का मुनाफा हुआ और 2025-26 में उसका मुनाफा कुल 18047 करोड़ रुपये तक पहुंच गया।
कितना महंगा हुआ कच्चा तेल?
अगर कच्चे तेल की कीमतों को देखें तो ब्रेंट क्रूड की कीमत जनवरी 2021 में 55 डॉलर और WTI क्रूड की कीमत लगभग 52 डॉलर थी। 2021 के आखिर तक यह 70 डॉलर के पार पहुंच गई थी और 2022 के जून महीने तक कच्चे तेल की कीमतें 115 डॉलर के आसपास थीं। हालांकि, यहां से गिरावट शुरू हुई और 2024 के आखिर में एक बार फिर से कच्चे तेल की कीमतें 70 डॉलर के आसपास आ गई थीं। 2025 में कच्चा तेल और सस्ता होता गया और दिसंबर 2025 में इसकी कीमत 60 डॉलर प्रति बैरल तक आ गई।
2026 की शुरुआत में भी कच्चा तेल सस्ता था लेकिन जैसे ही अमेरिका और इजरायल ने ईरान पर हमला किया कच्चे तेल की कीमतें आसमान छूने लगीं और अब एक बैरल कच्चे तेल की कीमत लगभग 100 डॉलर के आसपास पहुंच गई है।
तेल की कीमतों को लेकर सवाल उठने की अहम वजह है कि कंपनियों ने पिछले पांच साल में अच्छा-खासा मुनाफा कमाया लेकिन चंद महीनों के नुकसान के बाद ही तेल के दाम बढ़ा दिए।
